इंटरमिटेंट फास्टिंग: डाइटिशियन, फिटनेस ट्रेनर और जनरल फिजिशियन से जानिए, ये हेल्थ के लिए कितना फायदेमंद

Expert Views on Intermittent Fasting: पिछले कुछ सालों में लोगों के बीच वजन घटाने (Weight Loss) का चलन तेजी से बढ़ा है. इसके लिए तमाम तरीके अपनाए जा रहे हैं. इनमें से एक इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) है, जो इन दिनों लोगों की जुबां पर चढ़ा हुआ है. बड़ी संख्या में लोग इस तरीके से अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें से कई लोगों को इसका सही तरीका नहीं पता होता, जिसकी वजह से उन्हें फायदे के बजाय नुकसान हो सकता है. आज आपको बताएंगे कि इंटरमिटेंट फास्टिंग क्या है और इस पर एक्सपर्ट्स की क्या राय है.

क्या है Intermittent Fasting?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक ‘इंटरमिटेंट फास्टिंग’ एक ईटिंग प्लान (Eating Plan) होता है, जिसमें व्यक्ति पूरे दिन में एक निश्चित समय पर खाना खाता है और बाकी घंटों में फास्टिंग की जाती है. इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाने का एक पैटर्न बनाया जाता है, जिसमें सबसे प्रचलित 16:8 पैटर्न है. इस पैटर्न के तहत व्यक्ति दिन में केवल 8 घंटों के दौरान खाना और अन्य पोषक पदार्थ ले सकता है, जबकि बाकी 16 घंटों में सिर्फ पानी पीकर फास्टिंग करनी होती है. इसके अलावा कई बार लोग अल्टरनेट डे पर फास्टिंग करके वजन घटाने की कोशिश करते हैं. इसे वजन घटाने का एक तरीका माना जाता है.

दिल्ली एम्स की पूर्व चीफ डाइटिशियन रेखा शर्मा के मुताबिक आमतौर पर लोग इस पर फोकस करते हैं कि क्या खाना चाहिए. जबकि इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान यह जरूरी होता है कि कब खाना चाहिए. हर दिन कुछ घंटों के लिए फास्टिंग करना या वीक में सिर्फ एक दो बार खाना खाने से आपका शरीर कैलोरी बर्न कर सकता है. इससे आपका वजन घट सकता है. कुछ वैज्ञानिक प्रमाण भी इसके फायदों की ओर इशारा करते हैं.

रेखा शर्मा कहती हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग में हर दिन 12 या 16 घंटे तक उपवास और शेष घंटों में भोजन करना शामिल है. एक लोकप्रिय उदाहरण 16/8 विधि है. इसमें प्रतिदिन 16 घंटे का उपवास और 8 घंटे की खाने की विंडो है, जिसमें आप 2, 3, 4 बार भोजन कर सकते हैं. खाने के घंटे कम हैं इसलिए लोगों को पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन और खनिजों के साथ संतुलित आहार लेने की जरूरत होती है. विटामिन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर डाइट लेना बेहद जरूरी होता है.

ऐसे कई अध्ययन हैं जो वजन घटाने और डायबिटीज कंट्रोल के लिए इस पद्धति का समर्थन करते हैं. हालांकि कुछ इसका समर्थन नहीं करते, क्योंकि खाने के लिए सीमित समय है, कैलोरी भी स्वचालित रूप से कम हो जाती है जिससे वजन कम हो जाता है. एम्स की पूर्व चीफ डाइटिशियन इंटरमिटेंट फास्टिंग की प्रशंसक नहीं हैं. उन्हें लगता है कि इस दौरान कम कैलोरी और शारीरिक गतिविधि की वजह से वजन कम होता है. भोजन के बिना लंबे समय तक रहने से एसिडिटी की समस्या भी हो सकती है.

Trainer arun singh

फिटनेस ट्रेनर अरुण सिंह के मुताबिक इंटरमिटेंट फास्टिंग ट्रेडिशनल फास्टिंग का नया वर्जन है और इसके साथ जिम जारी रख सकते हैं. फास्टिंग के दौरान एक्सरसाइज करना इफेक्टिव होता है. इस दौरान हेल्दी डाइट लेनी चाहिए. आमतौर पर लोग 16:8 फास्टिंग पैटर्न फॉलो करते हैं. इस बात का ध्यान रखने की जरूरत है कि लोगों को 8 घंटे वाली खाने की टाइमिंग शुरू होने से पहले कर एक्सरसाइज लेनी चाहिए. इसके अलावा उन्हें इलेक्ट्रोलाइट्स को हाई रखना चाहिए.

अरुण सिंह इंटरमिटेंट फास्टिंग लंबे समय तक करने की सलाह नहीं देते हैं. इसे कुछ सप्ताह तक ही फॉलो करना चाहिए. लंबे समय तक ऐसा करने से मसल्स का वजन कम हो जाएगा और परेशानी होना शुरू हो जाएगी. इसके अलावा खाने-पीने का भी बेहद ध्यान रखने की जरूरत होती है. बतौर फिटनेस ट्रेनर उन्होंने अब तक ऐसे कई लोगों को ट्रेनिंग दी है, जिन्होंने इंटरमिटेंट फास्टिंग की थी. वे कहते हैं कि उनमें से अधिकतर लोग अपना वजन घटाने में कामयाब रहे हैं.

dr aditi chaudhary

जनरल फिजीशियन और बीएसएफ की मेडिकल ऑफिसर डॉ. अदिति चौधरी के मुताबिक जो लोग डायबिटीज, हाइपरटेंशन या अन्य किसी बीमारी से जूझ रहे हैं, उन्हें इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करनी चाहिए. ऐसे लोगों के लिए ज्यादा देर तक भूखा रहना खतरनाक हो सकता है. इसके अलावा जो लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं, उन्हें भी इंटरमिटेंट फास्टिंग से पहले किसी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए. कई बार ऐसा करने से गैस्ट्रिक परेशानियां हो सकती हैं. हालांकि यह हर शख्स की हेल्थ कंडीशन के ऊपर डिपेंड करता है. कुछ लोगों की हेल्थ के लिए यह फायदेमंद हो सकता है और कुछ लोगों को इससे परेशानी भी हो सकती है.

डॉ. अदिति चौधरी कहती हैं कि आमतौर पर डॉक्टर इंटरमिटेंट फास्टिंग की सलाह नहीं देते हैं. हर व्यक्ति के शरीर को हर दिन एक निश्चित मात्रा में कैलोरी, फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और पोषक तत्वों की जरूरत होती है. अगर आप इंटरमिटेंट फास्टिंग में 16 या 18 घंटे की फास्टिंग विंडो रखते हैं, तो हेल्दी डाइट लेना बेहद जरूरी होता है. वरना इससे वीकनेस फील होगी. खास बात यह है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग के दौरान जंक फूड या ऑइली फूड नहीं खाना चाहिए. जंक फूड से आपको जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलेंगे और फायदे की जगह नुकसान हो सकता है.

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Atul Tiwari

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