बंदरों की वजह से ताजमहल की खूबसूरती का हो रहा है नुकसान

Image Source : FILE PHOTO
Monkey in Tajmahal

Highlights

  • ताजमहल समेत पूरे आगरा में बंदरों का भयानक आतंक है
  • आगरा में बंदरों की संख्या में 10 सालों में तीन गुना इजाफा हुआ है
  • लेकिन जिला प्रशासन और वन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है

Tajmahal: कहते हैं कि एकबार जब ताजमहल को देखने लग जाओ तो उससे नजर हटाना मुश्किल हो जाता है। दुनिया के सात अजूबों में से एक है ताजमहल। सुंदरता देखते ही बनती है। लेकिन आजकल ताजमहल की सुंदरता को बंदर बट्टा लगाने में जुटे हुए हैं। इसके अलावा और भी आवारा जानवर वहां आने वाले पर्यटकों को परेशान कर रहे हैं। सोमवार को ताजमहल के फाउंटेन को बंदरों ने स्विमिंग पूल की तरह इस्तेमाल किया।

इसके अलावा ताजमहल के गेट पर आवारा सांडों की लड़ाई में एक पानी का आरओ टूट गया। वो तो गनीमत रही की लड़ाई के वक्त ताजमहल बन्द हो चुका था और कोई पर्यटक मौजूद नहीं था। वरना सांडों की लड़ाई में कौन घायल होता पता नहीं? ऐसा नहीं है कि आने वाले पर्यटक केवल बंदरों से ही परेशान हों। नहीं, उन्हें परेशान करने में आवारा कुत्ते, मधुमक्खियां और आवारा सांड अपनी पूरी भूमिका निभा रहे हैं। जिनके ऊपर इन्हें रोकने की जिम्मेदारी है, वो उससे भाग रहे हैं।

ताजमहल बना बंदरों के लिए स्विमिंग पूल

ताजमहल में लगी पानी की टंकियों पर मधुमक्खियों का कब्जा है। जिसके चलते वहां आने वाले पर्यटकों को परेशानी होती है। बाहर और अंदर दोनों ही जगह आवारा कुत्ते भी पर्यटकों को परेशान करते हैं। बाहर आवारा घूमने वाले गाय और सांड कई बार पर्यटकों को नुकसान पहुंचा चुके हैं। परिसर में बंदरों के जबरदस्त आतंक है। सोमवार को ताजमहल के अंदर का वीडियो सामने आया। वीडियो में दर्जनों बंदर ताजमहल के फाउंटेन के अंदर डुबकियां लगा रहे हैं। 

ताजमहल में लगने वाले मधुमक्खियों के छत्तों को हटाने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग की है। बंदर पकड़ कर जंगल मे छोड़ना वन विभाग का काम है और आवारा कुत्तों, गाय और सांड को पकड़ना नगर निगम की जिम्मेदारी है। तीनों ही विभाग आंख मूंदकर कर बैठे हैं, जिससे परेशान पर्यटकों को होना पड़ रहा है।

कम नहीं हो रहा बंदरों का आतंक

ताजमहल समेत पूरे आगरा में बंदरों का भयानक आतंक है।कुछ दिनों पहले प्रशासन ने दो करोड़ खर्च कर आगरा में बंदरों को पकड़ कर उनकी नसबंदी शुरू की थी। कई जगह पिंजरे लगाए गए थे पर बाद में यह योजना जैसे ही समाप्त हुई, बंदरों का आतंक फिर से शुरू हो गया। आगरा में बंदरों की संख्या में 10 सालों में तीन गुना इजाफा हुआ है। इसके बावजूद तमाम पशु प्रेमी संस्थाओं के विरोध के चलते इसका कोई उचित उपाय नहीं है।

Atul Tiwari

Atul Tiwari

Leave a Reply

Your email address will not be published.